Sunday, June 6, 2010

हम इंसान या जानवर !



आज टी.वी देखते वक़्त एक चैनल पर आ कर हाथ रुक गए , उस चैनल पर कुछ ऐसा आ रहा था , जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया , जो की इस ब्लॉग का शीर्षक है की कहीं हम जानवरों से बदतर तो नहीं हो गए ? लेकिन फिर मुझे लगा की ऐसा कहकर मैं जानवरों की बेइजती तो नहीं कर रहा , क्योंकि अगर हम वन्य जीवन को देखें तो  पाएंगे की जानवरों के भी कुछ उसूल है और वो उन्ही पे चल कर अपना जीवन काटते हैं ,
अब हम इंसानों के लिए इससे भी बुरी  कोई संज्ञा दूढ्नी पड़ेगी , दरसल मैं भारत में बाघों की दशा पर एक सीरियल देख रहा था , मुझे ये देख कर बड़ा दुःख हुआ की अब इंसान पैसे के लालच के चलते इतना गिर जायेगा की  वो बाघ जैसे खूबसूरत जानवर की जान के पीछे पड़ जायेगा , जो इन्हें मारते हैं वो तो इस जघन्य अपराध में दोषी  हैं ही जो इनका साथ देते हैं वो इनसे भी बड़े दोषी हैं , भारत सरकार ने वन्य जीवन की रक्षा के लिए जिन - जिन को नियुक्त किया है आज वो  रक्षक की जगह  बक्षक बन गए , ये हम सभी को पता है की वन विभाग में हर कोई अपनी नियुक्ति चाहता है , और वो ऐसा क्यों चाहता ये भी सबको पता है , लेकिन अब तो हद ही हो गयी है , ये पढ़े लिखे "आइ
.ए .यस" , पी .सी .यस अधिकारी "हैं, अब और क्या कहा जाये , यहाँ से खामोस हो जाना ही बेहतर है , पर ये खामोसी कमजोरी नहीं है , अभी तक कुछ नहीं हुआ तो अब होगा , मेरी आप सब से प्राथना है , चुप ना बैठें आवाज उठाएं , नहीं तो एक दिन ऐसा भी आएगा जब बाघ केवल किताबों ही दिखेंगे .
धन्यवाद .

2 comments:

Udan Tashtari said...

जरुरी है यह जागरुकता!

Shekhar Kumawat said...

aavashayyk kam hai ye